tum

tum

Tum!

देवदार के पेड़ों पर चढ़कर

चाँद पर लंगड़ मारे हैं

 

गोरी गोरी इस पतंग के

मांझे रात जैसे कारे हैं

 

जाल भी फेंका है तो

फंसते केवल तारे हैं

 

कैसा ये चांदी का अंडा

हम सोने का दिल हारे हैं

 

तेरे मेरे बीच न जाने

और कितनी दीवारें हैं

 

तू हाथ ना आया तो क्या

रात के कार्बन पेपर पर हमने

तेरे लाखों अक्स उतारे हैं|

 

deodaar ke pedon par chadhkar

chand par langad maare hain

 

gori gori is patang ke

maanjhe raat jaise kaare hain

 

jaal bhi fenka hai to

fanste keval taare hain

 

kaisa ye chandi ka unda

hum sone ka dil haare hain

 

tere mere beech na jaane

aur kitni deewaren hain

 

tu haath na aaya to kya

raat ke carbon paper par humne

tere laakhon aks utaare hain.

देवदार: cedar  |  लंगड़: thread with a pebble at its end for capturing kites  |   मांझा: kite flying thread  |  अक्स: image, छवि

Average: 9.2 (6 votes)
n

Comments

Bhumika's picture
wah wah..
Anonymous's picture
wow...
jyotsna's picture
क्या लिखा है! कैसा ये चांदी का अंडा, हम सोने का दिल हारे हैं| रात के कार्बन पेपर पर तेरे, लाखो अक्स उतारे हैं|
ushagunjan's picture
wahhh
Anonymous's picture
Swee Soft Sublime

Add new comment

December 2017
SunMonTueWedThuFriSat
262728293012
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31123456

In | Subscribe | Home | About us | Mission | Poet | Share

Words | Archive | Comments | Rating